आज मैं आपको हर सिद्धि माता की पौराणिक कथा को बताने जा रहा हूं व इन्हे राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी हर सिद्धि माता की कथा के रूप मे भी विश्व विख्यात है -
हर सिद्धि माता/मांगल-चांण्डिका माता की पौराणिक कथा :-
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हर सिद्धि माता उज्जैन |
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माता सती के पिता दक्ष प्रजापति ने एक विराट यज्ञ का आयोजन करवाया था जिसमें उन्होंने सभी देवी देवता व गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया परंतु उन्होंने माता सती व भगवान शिव जी को नहीं बुलाया, फिर भी माता सती उस यज्ञ उत्सव में उपस्थित हुई वहां माता सती ने देखा कि दक्ष प्रजापति यानी उनके पिता देवाधि देव महादेव का अपमान कर रहे थे यह देख माता सती क्रोधित हो यज्ञ अन्निकुंड में कूद पड़ी । यह सब जानकर शिव शंभू अत्यंत क्रोधित हो उठे और उन्होंने माता शती का शव लेकर संपूर्ण विश्व का भ्रमण शुरू कर दिया । शिव जी की ऐसी दशा देखकर संपूर्ण विश्व में हाहाकार मच गया । देवी देवता व्याकुल होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और संकट के निवारण हेतु प्रार्थना करने लगे, तब शिवजी का माता सती से मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाया था, चक्र से माता सती के शव के कई टुकड़े हो गए । उनमें से 13 वां टुकङा माता सती के कोहनी के रूप मे एक टुकड़ा उज्जैन के इस स्थान पर गिरा तब से मां यहां हर सिद्धि माता मंदिर के रूप में स्थापित हुई ।
"इतिहास के पन्नों से यह ज्ञात होता है कि मां हर सिद्धेश्वरी
सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी थी ।"
जाने हरसिद्धि माता को राजा विक्रमादित्य ने अपना शीश भेंट क्यों किया/Know why King Vikramaditya offered his head to Harsiddhi Mata:-
मां हर सिद्धेश्वरी को प्राचीन काल में "मांगल-चांण्डिका" के नाम से जाना जाता है, राजा विक्रमादित्य इन्हीं देवी की आराधना करते थे एवं उन्हें 11 बार अपने शीष को काटकर मां के चरणों में समर्पित कर दिया था पर आचार्य वाहिनी मां पुनः उन्हें जीवित व स्वस्थ कर देती थी । यही राजा विक्रमादित्य उज्जैन के सम्राट थे जो अपनी बुद्धि पराक्रम और उदारता के लिए जाने जाते थे इन्हीं राजा विक्रमादित्य के नाम से विक्रम संवत सन् की शुरुआत हुई थी ।
जाने हरसिद्धि माता का मंदिर उज्जैन का विशेष धार्मिक महत्व/Know the special religious importance of Harsiddhi Mata Temple, Ujjain :-
उज्जैन में हर सिद्धि देवी की आराधना करने से शिव और शक्ति दोनों की पूजा हो जाती है ऐसा इसलिए है, कि यह ऐसा स्थान है जहां महाकाल और माता हर सिद्धि के दरबार है ।
कहते हैं कि प्राचीन मंदिर रुद्र सरोवर के तट पर स्थित था तथा सरोवर सदैव कमल पुष्पों से परिपूर्ण रहता था, इसके पश्चिमी तट पर देवी हर सिद्धि का तथा पूर्वी तट पर महाकालेश्वर महादेव का मंदिर था ।
18वीं शताब्दी में इन मंदिरों का पुनर्निर्माण हुआ । वर्तमान हर सिद्धि मंदिर चहार दीवारी में गिरा है देवी प्रतिमा मंदिर के प्रमुख पीठ पर प्रतिमा के स्थान पर श्री यंत्र है इस पर सिंदूर चढ़ाया जाता है अन्य प्रतिमाओं पर नहीं और उसके पीछे भगवती अन्नपूर्णा की प्रतिमा है, गर्भ ग्रह में हर सिद्ध देवी की प्रतिमा की पूजा होती है । मंदिर में महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती की प्रतिमाएं हैं ।
Ujjain में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर(Harsiddhi mata mandir) प्रांगण मे विद्यमान 1001 दीप मालाओ की विशेषता:-
मंदिर के पूर्वी द्वार पर बावड़ी है जिसके बीच में एक स्तंभ है जिस पर संवत 1447 अंकित है तथा पास में ही सप्त सागर सरोवर है । मंदिर की सीढ़िया चढ़ते ही सामने मां हर सिद्धि के वाहन सिंह की विशाल प्रतिमा स्थापित है । द्वार के दाई ओर दो बड़े बड़े नगाड़े रखे हैं जो प्रातःकाल व साय काल की आरती के समय बजाए जाते हैं । मंदिर के सामने दो बड़े दीप स्तंभ है इनमें से एक दीप का नाम शिव है जिसमें 501 दीप मालाएं हैं तथा दूसरे स्तंभ का नाम पार्वती है जिसमें 500 दीप मालाए है तथा दोनों दीप स्तंभों पर एक साथ दीपक जलाये जाते हैं, कुल मिलाकर इन 1001 दीपकों को जलाने में एक समय में लगभग 45 लीटर तेल लगाया जाता है ।
श्री हर सिद्धि मंदिर के गर्भ ग्रह के सामने सभा ग्रह में श्री यंत्र निमृत है, कहा जाता है कि यह "सिद्ध श्री यंत्र" ही है जिनके दर्शन मात्र से ही पुण्य का लाभ प्राप्त होता है । शुभ फल प्रदायिनी इस मंदिर के प्रांगण में शिवजी का ककोड़ केश्वर महादेव मंदिर भी है जो कि 84 महादेव में से एक है, जहां काल सर्प दोष का निवारण होता है ऐसा लोगों का विश्वास है । मंदिर प्रांगण के बीचो बीच दो अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है जिनके दर्शन भक्तों के लिए शांति दायक रहता है, प्रांगण के चारों दिशाओं में चार प्रवेश द्वार है एवं मुख्य प्रवेश द्वार के भीतर माता सिद्धि सभागृह के सामने दो दीप मालाए बनी हुई है जो आकाश की ओर मुख किए हुए काले स्तंभ के रूप मे विद्यमान है जो प्रांगण के भीतर रहस्यमय वैभव का वातावरण स्थापित करते हैं, यह दीप मालिकाएं मराठा कालीन है ।
maa Harsiddhi :- क्या आप जानते है Ujjain(मध्यप्रदेश) में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर शक्तिपीठ (Harsiddhi mata mandir) का नामकरण आखिर मां हरसिद्धि ही क्यों पङा :-
ज्योतिष के अनुसार इसका शक्ति पीठ नामकरण किया गया है यह नामकरण इस प्रकार है - स्थान का नाम 13 उज्जैन, शक्ति का नाम मांगल-चांण्डिका और भैरव का नाम कपिला आंबर है । इस प्राचीन मंदिर के केंद्र में हल्दी और सिंदूर की परत चढ़ा हुआ पवित्र पत्थर है जो कि लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है ।
जय मां मांगल-चांण्डिका ।
जय हर सिद्धि माता ।
जय महाकालेश्वर ।
जय भैरव नाथ ।
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