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श्रीराम नोट |
भगवान श्रीराम नाम की मुद्रा ~
श्रीराम भक्त डॉक्टर टोनी नेडर की श्रीराम भक्ति की अनोखी अनसुनी कहानी ~
डॉक्टर आधिराज राजाराम लेबनान देश से है जहाँ पर 59% मुस्लिम पॉपुलेशन रहती है, ये एक न्यूरोसाइंटिस्ट और मेडिकल साइंस रिसर्चर होते हुए भी प्रेज़िडेंट है पोलैंड की महाऋषि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट और महाऋषि ओपन यूनिवर्सिटी के जहाँ पर वेद और वेदिक लिटरेचर की स्टडी की जाती है, इन यूनिवर्सिटीज़ के फाउंडर हैं । भारत के एक फेमस योगी जिनका नाम है महर्षि महेश योगी दोस्तों डॉक्टर टोनी, महर्षि महेश योगी के ही शिष्य हैं इन्हीं के माध्यम से इन्होंने रामायण की स्टडी की थी और ये महर्षि को ही अपना मास्टर मानते हैं और आपको जानकर हैरानी होगी कि डॉक्टर टोनी महाऋषि के साथ मिलकर हमारे वेदों में मौजूद मेडिकल साइंस यानी की आयुर्वेद के अद्भुत ज्ञान के ऊपर 50 से ज्यादा देशों में लेक्चर भी दे चूके हैं और जैसा कि हम को पता है कि यह नीदरलैंड में भगवान श्रीराम की मुद्रा को लीड करते हैं । इस करेंसी पर भगवान श्रीराम की फोटो होती है जो इसोट की जाती है ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस के द्वारा, इस और्गनाइज़ेशन के फाउंडर भी महर्षि महेश योगी ही है । भगवान श्रीराम की यह मुद्रा सन 2002 में इसोट की गई थी, जो नीदरलैंड के 30 शहरों और गाँवों में चलती है साथ में अमेरिका के कुछ शहरों में भी राम करेंसी को अप्रूवल दिया गया था ।
भगवान श्रीराम के नोटो की कीमत व तथ्य ~
नीदरलैंड में एक राम= 10 यूरो के और अमेरिका में एक राम= 10 अमेरिकी डॉलर्स, भगवान श्रीराम का ये नोट सन् 2002 में नीदरलैंड के एक सिक्योरिटी डॉक्यूमेंट्स प्रिंटर के द्वारा प्रिंट किया गया था यहाँ पर 1, 5 और 10 के तीन श्रीराम नोट निकाले गए थे और 2002 में ही अमेरिका में मौजूद महर्षि वेदिक सिटी में 40,000 US डॉलर की कीमत के राम नोटों का लेनदेन हुआ था । इसको आप ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस के विकिपीडिया पेज पर भी चेक कर सकते हो तो दोस्तों हमें गर्व होना चाहिए भगवान राम के सच्चे भक्त और राम करेंसी के लीडर डॉक्टर टोनी पर और हमारे वेद और रामायण की स्टडी करने के बाद सन् 2008 में महर्षि महेश योगी ने इनका नाम डॉक्टर आधि राज़ राजा राम और राजा नेडरराम रख दिया था और इसके बाद इन्होंने सन 2011 में रामायण इन ह्यूमन साइकोलॉजी के नाम से एक बुक पब्लिश की थी जिसमें इन्होंने वाल्मीकि रामायण के इवेंट्स को ह्यूमन साइकोलॉजी के फंक्शन्स और स्ट्रक्चर्स के साथ रिलेट किया था और साथ में ही डॉक्टर टोनी ने बताया था कि रामायण एक नैचरल लकी स्टोरी है, जो दुनिया के हर एक इंसान को पढ़नी चाहिए । दोस्तों रामायण इन ह्यूमन साइकोलॉजी से पहले यानी की 1994 में इन्होंने अपनी पहली बुक पब्लिश की थी, जिसका नाम था ह्यूमन साइकोलॉजी । तो इनकी ये किताब भी हमारे वेद और वेदिक लिटरेचर पर आधारित थी । तो आप यहाँ से ये अंदाजा लगा सकते हो की एक न्यूरोसाइंटिस्ट होते हुए भी ये सनातन धर्म के धर्मग्रंथों के ज्ञान पर इतना विश्वास करते हैं और इस वैदिक नॉलेज को किस तरह से अपने मेडिकल साइंस के फील्ड में यूज़ करते हैं तो दोस्तों ये थी अनसुनी कहानी डॉक्टर टोनी की जो हमारे लिए काफी ज्यादा प्रेरणादायक है ।
जय भगवान श्रीराम की ।
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