उत्तरप्रदेश राज्य के प्रयागराज जिले मे आयोजित होने वाला 2025 महाकुंभ मेला तीन नदियो के त्रिवेणी संगम पर आयोजित होता है, इन तीनो नदियो के तट पर ही महास्नान किया जाता है - गंगा नदी, यमुना नदी व विलुप्त सरस्वती नदी(तीनो नदियो का संगम)
क्या आपने कभी सोचा है कि कुंभ मेला आखिर तय कैसे होता है और यह महाकुंभ, अर्द्ध कुंभ और पूर्ण कुंभ में फर्क क्या है क्यों लाखों लोग हर 12 साल में इन मेले में शामिल होने के लिए एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचते हैं आज हम इन्हीं सवालों के जवाब जानने वाले हैं :-
जाने विशेष कुंभ मेले कि तारीख व जगह आखिर तय कैसे होती है/ Know how the date and place of the special Kumbh Mela is decided? :-
कुंभ मेला हिंदू धर्म का एक बहुत ही पवित्र और पुराना आयोजन है और इसके पीछे एक बहुत दिलचस्प पौराणिक कथा है, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से अमृत की कुछ बूँदे कुछ जगहों पर गिरी थी और इन्हीं स्थानों पर हर बार कुंभ मेला आयोजित होता है यह स्थान है
1.प्रयागराज
2.हरिद्वार
3.नासिक
4.उज्जैन ।
अब यह आयोजन तो सालों से हो रहा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन मेलों की तारीखें आखिर तय कैसे होती हैं कुंभ मेले की तारीखें पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओ पर आधारित होती हैं यह नहीं कि कोई भी तारीख ले ली और मेला लगा दिया, यह तारीख ही वैज्ञानिक और धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद तय की जाती है ।
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Maha Kumbh Mela 2025 |
जाने विशेष महाकुंभ मेले की तारीखें पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओ पर कैसे आधारित होती हैं/Know how the dates of special Kumbh Mela are completely based on astrological calculations :-
तो सबसे पहले आपको समझना होगा कि बृहस्पति और सूर्य की स्थिति के हिसाब से इन तारीखों का निर्धारण होता है जब बृहस्पति किसी खास राशि में होते हैं और सूर्य किसी खास राशि में होते हैं तो उस साल कुंभ मेला आयोजित किया जाता है और यह गणनाए कुछ इस तरह होती हैं:-
जब बृहस्पति ग्रह वृषभ राशि में हो और इस दौरान सूर्य मकर राशि में आते हो तो कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में होता है ।
जब बृहस्पति कुंभ राशि में हो और उस दौरान सूर्य मेष राशि में गोचर करते हैं, तब यह मेला हरिद्वार में आयोजित किया जाता है ।
जब सूर्य और बृहस्पति सिंह राशि में गोचर करते हैं तो कुंभ नासिक शहर में आयोजित होता है ।
जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में हो और सूर्य मेष राशि में हो तो कुंभ मेला का आयोजन उज्जैन शहर में आयोजित करवाया जाता है ।
कुंभ, अर्ध कुंभ और महाकुंभ में क्या अंतर है?/What is the difference between Kumbh, Ardha Kumbh and Maha Kumbh? :-
अब बात करते हैं आखिर अर्द्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ में क्या अंतर है:- दरअसल इन तीनों का नाम एक जैसे दिखते हैं लेकिन इनमें बहुत बड़ा अंतर है । "इनमे से महाकुंभ स्नान का मौका मनुष्य जीवन मे केवल एक बार प्राप्त करता है क्योकि महाकुंभ स्नान का विशेष संयोग पर्व केवल 144 सालो के बाद पुनः आता है ।"
जाने कुंभ के छोटे भाई अर्ध कुंभ मेले के बारे में विशेष तथ्य/ Know special facts about Ardh Kumbh Mela :-
सबसे पहले अर्द्ध कुंभ की बात करते हैं, यह मेला/अर्द्ध कुंभ हर 6 साल में एक बार आयोजित होता है और यह अर्द्ध कुंभ मेला दो स्थानों पर आयोजित होता है हरिद्वार और प्रयागराज अगर आप इसे थोड़ा और आसान तरीके से समझे तो यह पूर्ण कुंभ का आधा चक्र है अथार्थ एक तरह से यह कुंभ का छोटा भाई है ।
जाने आखिर पूर्ण कुंभ मेला 12 वर्षो मे सिर्फ एक बार ही क्यो लगता है/Know why the Kumbh Mela is held only once in 12 years :-
अब पूर्ण कुंभ मेला की बात करें तो यह हर 12 साल में एक बार चार प्रमुख स्थानों पर बारी बारी से आयोजित होता है यह वह वक्त होता है जब बृहस्पति और सूर्य की स्थिति ऐसी बनती है कि पूरा/पूर्ण मेला/पूर्ण कुंभ मेला आयोजित करना जरूरी होता है ।
जाने कुंभ मेलो के राजा "महाकुंभ मेले" के बारे मे 144 साल बाद प्रयागराज मे एक विशिष्ट योग/Know about the king of Kumbh fairs "Mahakumbh Fair", a special event in Prayagraj after 144 years :-
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महाकुंभ मेला(कुंभ= कलश) |
लेकिन जो सबसे खास होता है वह है महाकुंभ मेला, कहते हैं कि कुंभ मेलों का राजा "महाकुंभ मेला" है, क्योंकि यह मेला हर 144 साल में एक बार आयोजित होता है और यह सिर्फ प्रयागराज में ही आयोजित होता है यह महाकुंभ एक विशाल धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन होता है जहां लाखों करोड़ों भक्त एक साथ इकट्ठा होते हैं इस महाकुंभ की विशेषता यह है कि इसे पूरी मानवता के पापों से मुक्ति पाने और मोक्ष की प्राप्ति के रूप में देखा जाता है लेकिन कुंभ मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं है यह भारतीय समाज और संस्कृति का एक जीवंत उदाहरण है, लाखों करोड़ों श्रद्धालु इसमें शामिल होने के लिए दूर दूर से आते हैं और यहां सिर्फ स्नान ही नहीं बल्कि धार्मिक प्रवचन, कथा वाचन, योग शिविर और भजन संध्या जैसे आयोजनों से वातावरण और भी पवित्र बन जाता है कुंभ मेला ना सिर्फ धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी एक बड़ा आयोजन है ।
यहां अखाड़े अपनी ताकत और संतों के बीच परंपराओं का आदान प्रदान करते हैं ।
यह मेला समाज की एकता और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है तो अब आप जान चुके हैं कि कुंभ मेला क्या है इसके मेलों की तारीखें कैसे तय होती हैं तथा अर्द्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ में क्या फर्क है ।
अंतत जब कभी आप कुंभ मेला जाएं तो इस आयोजन के पीछे की पौराणिक कथाओं, ज्योतिषीय गणनाओ और सांस्कृतिक महत्व को जरूर महसूस करें ।
कुंभ मेला 2025 शाही स्नान तारीख/कुंभ मेला कब है 2025 शाही स्नान?/Kumbh Mela 2025 Shahi Snan Date :-
महाकुंभ प्रयागराज में कुल सात स्नान है जिनमें से तीन शाही स्नान है और जो महाकुंभ शुरू होने के 21 दिनों के अंदर अंदर खत्म हो जाएंगे वह तीनो शाही स्नान निम्न है:-
जाने विशेष महाकुंभ के पहले शाही स्नान की तिथि व तारीख/Know the date and date of the first royal bath of the special Maha Kumbh :-
14 जनवरी 2025 को है उस दिन मकर संक्रांति है।
जाने 2025 प्रयागराज मे महाकुंभ का दूसरा विशेष शाही स्नान तिथि व वार/Know 2025 Second special Sahi Snan date and day of Mahakumbh in Prayagraj :-
29 जनवरी 2025 को है जो कि मौनी अमावस्या के दिन स्नान है ।
"प्रयागराज महाकुंभ" 2025 का तीसरा शाही स्नान बसंत पंचमी को/The third Shahi Snan of Prayagraj "Maha Kumbh 2025" is on Basant Panchami:-
शाही स्नान 3 फरवरी को है जो कि बसंत पंचमी के दिन है ।
यह तीनों के तीनों शाही स्नान बहुत ही महत्वपूर्ण होते है ।
प्रयागराज मे आयोजित महाकुंभ 2025 सभी विशेष स्नान की दिनांक व दिन/Date and day of all special bathing in Maha Kumbh 2025 organized in Prayagraj :-
वैसे प्रयागराज मे महाकुंभ के कुल सात स्नान है सात स्नान कुछ इस प्रकार है:-
पहला महाकुंभ विशेष स्नान दिन व दिनांक :-
13 जनवरी 2025 को जिस दिन सोमवार पड़ रहा है पौष पूर्णिमा के दिन यह स्नान किया जाएगा ।
दूसरा महाकुंभ विशेष स्नान दिन व दिनांक :-
14 जनवरी 2025 दिन मंगलवार मकर संक्रांति के दिन यह स्नान होगा ।
तीसरा महाकुंभ विशेष स्नान दिन व दिनांक :-
29 जनवरी 2025 के दिन है जो कि बुधवार मौनी अमावस्या के दिन होगा ।
चौथा महाकुंभ विशेष स्नान दिन व दिनांक :-
3 फरवरी 2025 वार सोमवार को है, जिस दिन बसंत पंचमी है ।
पांचवा महाकुंभ विशेष स्नान दिन व दिनांक :-
4 फरवरी 2025 के दिन है जिस दिन वार मंगलवार व तिथी अचला सप्तमी का स्नान होगा ।
छठा महाकुंभ विशेष स्नान दिन व दिनांक :-
12 फरवरी 2025 के दिन है, उस दिन वार बुधवार व माघी पूर्णिमा का स्नान होगा ।
सातवा व 2025 का अंतिम महाकुंभ विशेष स्नान दिन व दिनांक :-
26 फरवरी 2025 के दिन है,जिस दिन वार बुधवार और महाशिवरात्रि है । प्रयागराज मे महाकुंभ का आखिरी स्नान महाशिवरात्रि को है, जिसके साथ ही महाकुंभ प्रयागराज कुंभ मेले का समापन भी हो जाएगा ।
हर हर महादेव
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