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शुभ नवरात्रि |
गुप्त नवरात्रि मे पूजा व पूजा अनुष्ठान के नियम ~
वैसे तो साल मे चार नवरात्रि आते है जो हर तीन महीने के बाद आते है ।
1. चैत्र नवरात्रि ( बसंत नवरात्रि )
2. आषाढ नवरात्रि ( मानसून नवरात्रि )
3. अश्विन नवरात्रि ( शारदीय नवरात्रि )
4. माघ नवरात्रि
इन सभी नवरात्रि मे से दो नवरात्रि सामान्य होती है ~
1. चैत्र नवरात्रि ( बसंत नवरात्रि )
2. अश्विन नवरात्रि ( शारदीय नवरात्रि )
तथा दो गुप्त नवरात्रि होती है ~
1. आषाढ नवरात्रि ( मानसून नवरात्रि )
2. माघ नवरात्रि
इन दोनो गुप्त नवरात्रि को साधना सिध्दी नवरात्रि कहा जाता है ।
यह सभी चारो नवरात्रि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ऋतु परिवर्तन को भी दर्शाते है ।
गुप्त नवरात्रि में साधना कैसे करें? ~
आप गुप्त नवरात्रि मे साधना कर सकते हैं । गुप्त साधना से तात्पर्य होता है की ऐसी साधना जिसका किसी को ज्ञान न हो, ऐसा अनुष्ठान जिसको किसी का ज्ञान न हो । तो लोगों के प्रश्न आते है की ये कैसे हो सकता है जब हम एक छत के नीचे परिवार के सभी सदस्य रहते है तो घर परिवार के सभी लोगो को पता लगता है कि हम अनुष्ठान कर रहे हैं । घर परिवार के जितने लोग हैं , उनको पता लगने दे । लेकिन बाहर के जो अन्य लोग हैं उन्हें पता नहीं लगना चाहिए की आप गुप्त नवरात्रि कर रहे हैं इस बात का ध्यान रखें ।
गुप्त नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें? ~
क्या हम चौकी लगा सकते हैं, क्या हम कलश नारियल बिठा सकते हैं? देखिये चौकी आप सजा सकते है, नारियल भी बिठा सकते हैं । लेकिन आपको यह ध्यान रखना होगा की कलश बिठा करके नारियल बैठा करके आप बाहर नहीं जा सकते यानि 2-4 दिन के लिए आप घर से बाहर नहीं जा सकते । नौ दिन के लिए आपको घर में ही रहना होता है जो लोग कलश या चौकी बिठाते है ।
दूसरी बात अगर हमें बाहर जाना है तो कलश कैसे बिठाए ~
अगर आपको बाहर जाना है तो आप चौकी मत बिठाइये, आप कलश मत बिठाइए आप यह कर सकते हैं की आपको अपने पूजा के स्थान में ही आप दीपक लगा कर के माँ भगवती का जो भी अनुष्ठान करना चाहते हैं, जिसकी भी आप इच्छा रखते हैं वो अनुष्ठान आप कर सकते है । तो इस प्रकार से आप साधना भी कर पाएंगे, पूजा भी कर पाएंगे, अगर आपको कहीं जाना है तो जा भी सकते हैं । लेकिन जो साधना और पूजा का जो नियम होगा यानि सामान्य पूजा कर आप कर रहे हैं तो आप जा सकते लेकिन अगर आपने अनुष्ठान प्रारंभ रखा है तब आप घर से बाहर नही जा सकते हैं । अगर आप इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं तो आपका नियम खंडित होगा । आपकी साधना खंडित मानी जाएगी तो सब बातों को याद रखते हुए आपको संकल्प लेना है ।
गुप्त नवरात्रि में मां की पूजा कैसे करें? ~
गुप्त नवरात्रि/नवरात्रि की पूजा विधि क्या है? ~
लोंग, इलायची, सुपारी, पान के पत्ते, बताशे(पताशे), 4 बूंदी के लड्डू, 2 लड्डू भैरव जी के लिए और 2 लड्डू हनुमान जी के लिए बहुत जरुरी होते है । जब भी आप नवरात्र करे तो हनुमान जी और भैरव जी को जी को जरूर मनाए । आप यथाशक्ति फूल , फल ले सकते है । आपको कपूर की आवश्यकता होगी आरती के लिए, रोली की आवश्यकता होगी तिलक के लिए, फोटो की शुद्धिकरण के लिए आपको गंगा जल की आवश्यकता होगी या कच्चे दूध की आवश्यकता होगी, अगर आप कलश बैठाना चाहते हैं तो आपको पानी के कलश की आवश्यकता होगी । साथ में आम या अशोक के पत्ते चाहिए जो कि आपको कलश मे लगाने हैं । आपको माँ दुर्गा के लिए श्रृंगार के सामान आवश्यकता होगी जो की यथा शक्ति आप चाहे 2, 5, 7, 11, 16 जितना चाहे आप श्रृंगार का सामान रख सकते हैं , लेकिन आपको ध्यान रखना है अगर आप माँ दुर्गा के साथ माँ काली के लिए भी श्रृंगार अवश्य रखे, पंच-मेवा की आपको आवश्यकता होगी । अगर आप अखंड दीपक लगाना चाहते हैं तो लगा सकते है अन्यथा आप सुबह शाम घी का दीपक भी लगा सकते हैं । जब आप गुप्त नवरात्रि की चौकी बिठाएंगे तो आपको चौकी बिठाने के लिए वही सामग्री व विधि की आवश्यकता होगी, जो सामान्य नवरात्रि मे हमेशा से होती आई है । तो चौकी बिठाने के बाद में आपको वही अरदास करनी है । अगर आप कोई साधना करना चाहते हैं तो साधना करे अगर साधना नहीं कर रहे तो भी आप अरदास करे माँ भगवती के सामने आप अरदास करे की माँ आप सदा मेरी रक्षा करना, मेरे मन को संयमित रखना और अपने चरणों में मेरा ध्यान रखना जिससे मेरा ध्यान विचलित ना हो इस तरह की प्रार्थना कर सकते है ।नवरात्रि व्रत में शाम को क्या खाना चाहिए?/गुप्त नवरात्रि में किस तरह का भोजन करना चाहिए ?~
गुप्त नवरात्रि/नवरात्रि मे पाठ अनुष्ठान करने का सही नियम ~
सबसे महत्वूर्ण बात है की आप जो भी अनुष्ठान करना चाहते हैं वो अपने गुरु के मार्ग दर्शन में करे । बिना गुरु के मार्ग दर्शन कोई भी अनुष्ठान करना उचित नहीं होता । लेकिन फिर भी व्यक्ति का मन होता है कि अनुष्ठान करे तो आप अनुष्ठान कर सकते हैं - अनुष्ठान करते हुए आप यह ध्यान रखे की जो अनुष्ठान आपने प्रारंभ किया है उसका कुछ इस प्रकार से नियम होना चाहिए की आपको एक निश्चित समय पर पाठ करना चाहिए अगर आपने सुबह का संकल्प लिया है तो आपको सुबह के समय पाठ करना है । अगर आपने शाम का संकल्प लिया है यानि की आपने यह सोचा है कि मैं शाम के समय पाठ करूंगा या करूंगी तो आपको शाम के समय करना है । आप ऐसा न करे कभी आप सुबह पाठ कर ले, किसी दिन आप शाम को पाठ कर ले, किसी दिन दोपहर में पाठ कर ले ऐसा बिल्कुल न करें । आपको यह ध्यान रखना है की एक निश्चित समय पर ही आपको पाठ करना चाहिए तथा जिस समय आप पाठ करे उस समय आप का ध्यान पाठ पर ही होना चाहिए ।गुप्त नवरात्रि मे आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी के घर का भोजन, चाय इत्यादि नही लेना चाहिए, अगर आप किसी के घर का पानी चाय सेवन करते है तो आप के पुण्य का फल होता है वो उसको प्राप्त हो जाता है । तो ऐसी परिस्थित मे आप कोशिश करे कि इन नौ दिनो मे आपको कुछ खाना है या पानी पीना है तो आप यह सब खरीदकर पी सकते है ।
घर पर सरल नवरात्रि पूजा कैसे करें? ~
HIGHLIGHTS ~
卐 दो गुप्त नवरात्रि होती है ~
1. आषाढ नवरात्रि ( मानसून नवरात्रि )
2. माघ नवरात्रि
卐 साल मे चार नवरात्रि आते है जो हर तीन महीने के बाद आते है ।
1. चैत्र नवरात्रि ( बसंत नवरात्रि )
2. आषाढ नवरात्रि ( मानसून नवरात्रि )
3. अश्विन नवरात्रि ( शारदीय नवरात्रि )
4. माघ नवरात्रि
卐 गुप्त नवरात्रि मे साधना कर सकते हैं ।
卐 घर पर सरल नवरात्रि पूजा विधि ~
माँ दुर्गा जी की फोटो/मूर्ति के सामने अपने दाएं हाथ की तरफ देशी गाय के घी का दीपक सुबह और शाम को एक निश्चित समय पर करना चाहिए ।
卐 जय माता रानी की 卐
卐 जय भैरव बाबा की 卐
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