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दक्षिण भारत के हिंदू मंदिर सबरीमाला अयप्पा मंदिर/sabarimala temple का इतिहास/History of Sabarimala Ayyappa Temple / Sabarimala Temple, Hindu Temples of South India~
सबरीमाला मंदिर/sabarimala temple दक्षिण भारत के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में प्रतिवर्ष करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं । सबरीमाला मंदिर केरल राज्य में सहयाद्री पर्वत माला से घिरे हुए पठानमथिट्टा जिले में स्थित केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किलोमीटर की दूर पर पम्पा नामक स्थान है, पम्पा से सबरीमाला तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है यह रास्ता पांच किलोमीटर लंबा है । यह मंदिर हिंदू ब्रह्मचार्य देवता अय्यप्पन को समर्पित है, मंदिर के चारों ओर परियार टाइगर रिज़र्व का एक घना जंगल भी है । माना जाता है कि भगवान अयप्पा भगवान शंकर और मोहिनी के पुत्र थे, भगवान विष्णु को हरि और शिव को हर कहा जाता है ।
इसलिए इस आधार पर भगवान अयप्पा को हरिहर के नाम से भी जाना जाता है ।
जाने सबरीमाला मंदिर/sabarimala temple निर्माण का इतिहास/Know History of construction of Sabarimala temple ~
मान्यता है कि सबरीमाला मंदिर का निर्माण हजारों साल पहले राजा राजशेखर ने कराया था, पम्पा नदी के किनारे राजा राजशेखर को भगवान अयप्पा बाल रूप में मिले थे और वह उन्हें अपने महल ले आए । इसके बाद महल में रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन चूँकि राजा ने भगवान अयप्पा को अपना पुत्र माना था इसलिए वो पहले अयप्पा को राज़ सौंपना चाहते थे, जबकि रानी को यह मंजूर नहीं था । रानी ने तबियत का बहाना बनाकर अयप्पा को शेरनी का दूध लाने के लिए जंगल भेज दिया, जंगल में अयप्पा ने एक राक्षसी का वध कर दिया, जिससे खुश होकर इंद्र ने शेरनी को अयप्पा के साथ महल भेजा । यह देखकर लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ, पिता ने जब अयप्पा को राजा बनने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया और महल से गायब हो गए, काफी दिनों बाद भगवान अयप्पा ने पिता को दर्शन दिया और उस स्थान पर मंदिर बनवाने को कहा जिसके बाद राजा राजशेखर ने वहाँ सबरीमाला मंदिर का निर्माण कराया ।
सबरीमाला मंदिर/sabarimala temple के बारे में रोचक तथ्य जाने क्यो है विशेष/Interesting facts about Sabarimala temple/Sabarimala temple, know why it is special ~
इस मंदिर में कई विशेषताएं हैं जिसके कारण देश के कोने-कोने से श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। तो दोस्तों, आइए जानते हैं सबरीमाला मंदिर के बारे में रोचक तथ्य, यदि आप सबरीमाला मंदिर में नहीं गए हैं तो आपको बता दें कि इस मंदिर में जाने से पहले पम्पा नदी में स्नान करना पड़ता है और फिर एक दीपक जलाकर नदी में प्रवाहित करने के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया जाता है ।
सबरीमाला मंदिर अन्य मंदिरों की तरह पूरे साल नहीं खुला रहता बल्कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ नवंबर से जनवरी तक खुला रहता है और इसके बाद इसे बंद कर दिया जाता है ।
इस मंदिर में भगवान के प्रत्येक पूजा में घी का अभिषेक किया जाता है । मंदिर में जो भी श्रद्धालु घी लेकर जाते है उसे एक विशेष पात्र में जमा किया जाता है और फिर इसी घी से भगवान अयप्पा का अभिषेक किया जाता है । सबरीमाला मंदिर की खासियत यह है कि यह एक ऐसा मंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष 2 से 5 करोङ लोग दर्शन करने के लिए आते हैं । यह मंदिर 18 पहाड़ियों के बीच बना है और इसकी विशेषता यह है कि प्रत्येक पहाड़ी में एक मंदिर स्थित है ।
आपको बता दें कि सबरीमाला की 18 सीढ़िया बहुत प्रसिद्ध है, इनमें से पहली पांच सीढ़ियां व्यक्ति के पांच इंद्रियों, आठ सीढ़ियां मानवीय भावनाओं की और तीन सीढ़ियां मानवीय गुणों की, जबकि अंतिम दो मार्ग/सीढ़ियां ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक हैं।
sabrimala:-जानिए सच सबरीमाला मंदिर/sabrimala temple में महिलाओ के प्रवेश पर प्रतिबंध क्यो था/Know the truth why women were banned from entering Sabarimala temple ~
यह मंदिर भारत के अन्य मंदिरों से काफी अलग है इस मंदिर में स्थापित भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे इसलिए सदियों से इस मंदिर में ही सिर्फ पुरुष श्रद्धालु ही दर्शन करने के लिए जाते थे । अन्य मंदिरों की उपेक्षा सबरीमाला मंदिर के नियम भी बहुत कड़े हैं इसलिए श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करने के लिए सभी नियमों का पालन करना आवश्यक है । सबरीमाला मंदिर में आने के लिए श्रद्धालुओं को 41 दिनों का व्रत रखना पड़ता है चूकीं पीरयड्स के कारण महिलाएं यह व्रत पूरा नहीं कर पाती इसलिए उन्हें इस मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता था लेकिन पुरुषों को यह व्रत पूरा करके ही मंदिर में आना होता है ।
आपको बता दें कि केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध था। 800 साल पुराने इस मंदिर में यह मान्यता लंबे समय से चली आ रही थी। माना जाता है कि भगवान अयप्पा अविवाहित थे और हिंदू धर्म में महिलाओं को इस उम्र में अशुद्ध माना जाता है, जिसके कारण उन्हें इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
हालांकि 28 सितंबर 2018 को सर्वोच्च न्यायालय ने इस महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण घोषित किया । 2 जनवरी 2019 को, 50 वर्ष से कम आयु की दो महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहली बार सबरीमाला मंदिर में पूजा की।
सबरीमाला मंदिर:- sabrimala temple में जाने से पहले जाने प्रवेश के नियम/Know the rules of entry before going to Sabarimala temple ~
मंदिर में प्रवेश के लिए भक्तो को 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है और ये सीढ़ियां केवल वही लोग चढ़ सकते हैं जिन्होंने 41 दिनों का कठोर उपवास पूरा किया हो। सबरीमाला मंदिर के 18 सीढ़ियां पर चढ़ते समय भक्तो को सीढ़ियों के पास घी से भरा नारियल फोड़ना पड़ता है। नारियल का एक टुकड़ा हवन कुंड में डाला जाता है, जबकि दूसरा टुकड़ा भक्त प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाता है । मंदिर में जाने से पहले सबरीमाला के तीर्थयात्रियों को नीले या काले रंग के कपड़े पहनने पड़ते हैं जब तक यात्रा पूरी ना हो जाए तब तक वे अपनी दाढ़ी मूंछ नहीं बनवा सकते । सबरीमाला तीर्थयात्रा के दौरान प्रत्येक श्रद्धालु को अपने माथे पर चंदन का लेप लगाना आवश्यक है इसके अलावा पम्पा नदी में स्नान करने के बाद गणपति की पूजा भी करनी पड़ती है और फिर मंदिर की ओर प्रस्थान किया जाता है । इस मंदिर में प्रवेश करते समय भक्तो को 'तत्सम एसी' मंत्र का जाप करना होता है जिसका अर्थ है "वह तुम ही हो"।
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