कार्तिक मास स्नान महत्व पवित्र कार्तिक माह के छठे दिन की गणेश जी की कथा/Kartik month bathing significance Ganesha's story/tale of the sixth day of the holy Kartik month Story of Lord Ganesh Ji and Old Mai

  

कार्तिक मास

कार्तिक मास कथा-6

 गणेश जी और बूढ़ी माई की कथा ~

 एक समय की बात है, किसी गांव में एक अंधी बूढ़ी माई रहती थी वो अपने बेटे और बहू के साथ रहती थी, वो बहुत गरीब थे। वह बूढ़ी माई प्रतिदिन गणेश जी की पूजा अर्चना किया करती थीं । 1 दिन गणेशजी उससे प्रसन्न होकर उसके सामने प्रकट हुए और बुढ़िया से बोले - बूढ़ी माई तुम जो चाहो मुझसे मांग लो । बुढ़िया ने कहा प्रभु  लेकिन मुझे तो मांगना नहीं आता , तो कैसे और क्या मांगू? तब गणेश जी बोले ऐसा करो अपने बेटे और बहू से पूछ लो मैं कल फिर आऊंगा तब तुम जो चाहे मुझ से मांग लेना । ऐसा कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो  गए । बूढ़ी माई अपने बेटे के पास गई और उसे सारी बात कह दी। बेटा बोला माँ अन्न, धन और बड़ा मकान मांग लो। बेटे की बात बूढ़ीया मई को कुछ ठीक नहीं लगी । वो अपनी बहू के पास गई और उसे सारी बात बता दी, बहू बोली माँ जी ऐसा करो अपने लिए पोता मांग  लो, बुढ़िया माई को बहु की बात भी कुछ जंची नहीं । सभी की बात सुनकर बुढि़या माई अपनी पड़ोसन के पास गई और उसे सारी बात बताई, पड़ोसन बोली अरे बूढ़ी माई तू क्यों अन्नधन मांगे, तू क्यों पोता मांगे, तू तो खुद के लिए दीदा घोड़ा मांग ले, सभी की बात सुनकर बूढ़ी माई सोच में पड़ गई । अगले दिन वो पूजा करने बैठी तो गणेश जी महाराज उसके सामने प्रकट हुए और बोले सोच लिया बूढ़ी माई क्या मांगना है । बुढ़िया माई बोली, प्रभु मुझे तो मांगना नहीं आता, लेकिन यदि आप देना ही चाहते हो तो मुझे वरदान दो कि मैं अपने महल से घर में अपने पोते को सोने की चम्मच से दूध पीता देख सकूँ । बूढ़ी माई की बात सुनकर गणेश जी महाराज बोले, अरे वाह बूढ़ी माई तू ने तो मुझे ठग लिया ना मांगते हुए भी सब कुछ मांग लिया । अपने बेटे, बहू के लिए घर, सोने की चम्मच और पोता मांग लिया और खुद के लिए आंखें मांग ली । मैं तुझसे प्रसन्न हूँ जा  तुझे ये सब प्राप्त हो तथास्तु कहकर गणेश जी महाराज अंतर्ध्यान हो गए । देखते ही देखते बूढ़ी माई के झोपड़ी एक आलीशान महल में बदल गई और उसके अन्न धन,  सोने चांदी के भंडार भर गए । बूढ़ी माई की बहु गर्भवती हो गयी । कुछ समय बाद उसने एक चाँद से बेटे को जन्म दिया है। गणेशजी महाराज जैसी कृपा अपनी बूढ़ी माई और उसके परिवार पर करि वैसे ही इस कथा को कहते सुनते और हुंकारा भरते सब पर करना ।

 जय गणेश जी महाराज ।

जय गजानन जी महाराज की ।

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