पवित्र कार्तिक मास महात्म्य कार्तिक माह के दुसरे दिन की पवित्र कहानी/Significance of the holy month of Kartik story of the second day of Pavitra Kartik month

  

कार्तिक मास

कार्तिक मास

 कार्तिक माह के दूसरे दिन की माता सीता जी की पवित्र कहानी ~

जब भगवान श्रीराम वनवास काट रहे थे तब माता सीता ने 12 वर्ष तक नितनेम की कहानी कहने का 12 साल का नियम ले रखा था। "राम आए, लक्ष्मण आए, देश के पुजारी आये, नितनेम का नेम लाए, आओ राम बैठो, राम तपी रसोई जीमो राम, माखन मिश्री खाओ राम, दूध बताशा पिओ राम, सूद के फल का मोटो राम, शाल दुशाला ओढ़ो राम, जब बोलू जब राम ही राम राम सवारे सबके काम खाली घर भंडार भरेंगे, सबका बेड़ा पार करेंगे", जय श्री राम जय जय राम। ये कहानी सीता माता रोज़ कहती थी और श्रीराम इसे सुना करते थे। 1 दिन श्री राम को लक्ष्मण जी के साथ किसी काम से बाहर जाना पड़ा तो सीता माता बोली भगवान मेरे 12 वर्ष का नित्य नियम का नियम है। अगर आप बाहर जाएंगे तो मैं अपनी कहानी किसे सुनाऊंगी श्रीराम ने कहा, तुम कुएं की पाल पर जाकर बैठ जाना और वहाँ पर जो औरतें पानी भरने आएंगी, उन्हें अपनी कहानी सुना देना। सीता माता कुएं की पाल पर जाकर बैठ गई, एक स्त्री आयी, उसने रेशम की जरी वाली साड़ी पहन रखी थी और सोने का घड़ा ले रखा था। सीता माता उसे देखकर कहने लगी बहन मेरा 12 वर्ष का नितनेम सुनने का नियम है, मेरी कहानी सुन लो पर वह स्त्री बोली मैं तुम्हारा नितनेम सुनने बैठूंगी तो मुझे घर जाने में देर हो जाएगी और मेरी सास मुझसे लड़ेगी। उसने कहानी नहीं सुनी और वहाँ से चली गई। घर पहुंचते पहुंचते उसकी रेशम जरी की साड़ी फट गयी और सोने का घड़ा मिट्टी का हो गया। सास ने देखा तो बोली ये किसका दोष अपने सिर ले कर आ गयी है? बहू बोली माता जी मैं भी हैरान हूँ ये कैसे हुआ? मैं तो कुएं से पानी भरकर आ रही हूँ, पर कुए पर एक औरत बैठी थी और उसने मुझसे अपनी कहानी सुनने को कहा पर मैंने मना कर दिया। शायद ये उसी का फल है। सास तुरंत वही साड़ी पहनकर कुएं की पाल पर गई। सास को वहाँ सीता माता बैठी मिली और बोली बहन मेरी कहानी सुन लो। सास बोली एक बार छोड़ मैं तो चार बार तेरी कहानी सुनूंगी। सीता माता बड़ी प्रसन्न हुई और कहानी कहने लगी। कहानी सुनकर सास बोली बहन कहानी तो बहुत अच्छी लगी, वो स्त्री उनके चरणों में गिर पड़ी और फिर अपने घर चली गयी। उसकी साड़ी फिर से रेशमी जरी की बन गई और मिट्टी का घड़ा फिर से सोने का हो गया। घर पहुंची तो बहू बोली सासु माँ आपने यह कैसे किया? सास बोली बहू तू तो दोष लगाकर आयी थी, मैं तेरा दोष उतारकर आ रही हूँ वो स्त्री जो तुझे मिली थी वो "सीता माता थी, पुराने से नया कर देती है। खाली घर में भंडार भर देती है। सभी इच्छाएं पूरी करती हैं ।" बाहु बोली ऐसी कहानी मुझे भी सुनाओ सास ने वही कहानी बहू को भी सुना दी। कहानी सुनकर बहू बोली, माताजी, कहानी तो बहुत अच्छी हैं, इसे हम रोज़ कहा करेंगे । 

अब सास बहु रोज़ सवेरे उठकर कहानी कहने लगी। 1 दिन उनके घर पड़ोस की एक औरत आई और बोली बहन ज़रा सी आंच तो दे दो । सास बोली आंच तो हमने अभी नहीं जलाई है । पड़ोसन बोली तुम तो सुबह 5:00 बजे से उठी हो। फिर क्या कर रही थी तो सास बोली सुबह उठकर हम सीता माता की नितनेम की कहानी कहते हैं। पड़ोसन बोली ये कहानी मुझे भी सुना दो कहानी सुनकर पड़ोसन बोली अब ये सीता माता की नितनेम की कहानी, मैं भी रोज़ सुनूंगी। कहानी कहने से सीता माता ने पड़ोसन के भंडार भी भर दिए हें। सीता माता जैसे उनके भंडार भरे इस कहानी को कहते सुनते और हुंकार भरते, सभी के भंडार भरना ।

 जय माँ सीता ।

जय राम जी की ।

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