भाईदूज/यम द्वितीया क्यों मनाया जाता है/Why is Bhaidooj/Yam Dewitiya celebrated?

  

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भाईदूज/यम द्वितीया



Bhai Dooj:- जाने दूज उत्सव की कहानी क्या है दिवाली के बाद दूसरे दिन ही भाई दूज क्यों मनाया जाता है/What is the story of Bhai Dooj festival? Why is Bhai Dooj celebrated on the second day after Diwali ~

भाईदूज भाई और बहन के रिश्ते में मिठास और मजबूती भरने वाला पर्व है । इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है । कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया के दिन ये पर्व मनाया जाता है । वैदिक समय में इस पर्व को भ्रातृ द्वितीया के नाम से जाना जाता था, इस दिन भाई अपने बहन के वहाँ भोजन करने और उसे आशीर्वाद देने के लिए जाते हैं, इस विषय में हमारे शास्त्रों में एक पौराणिक कथा आती है की एक समय यमराज जी आज के ही दिन अपनी बहन यमुना के घर गए थे तब यमुना देवी ने अपने भाई की पूजा की थी और उन्हें स्वादिष्ट भोजन प्रसाद खिलाया था । उस दिन यमराज जी उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहते हैं कि जो भी व्यक्ति कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया के दिन यमुना नदी में स्नान करेगा उसे यम लोक का दर्शन नहीं करना पड़ेगा । इसलिए इस दिन यमुना नदी में स्नान करने की विशेष महिमा बताई गई है । स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में बताया गया है कार्तिक च द्वितीया पूर्वाह्न यम अर्चाय भानुजा याम नर हंसना तवा अयम लोकम न पश्यति अर्थात गोस्वामी कहते हैं कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमुना में स्नान करके पूर्वाहन में यम की पूजा करने वाला कदापि यमलोक का दर्शन नहीं पाता है । कार्तिक शुक्ला के द्वितीय दिन यमुना अपने गृह में यम का पूजन तथा यम को भोजन प्रदान करती है । स्कंद पुराण में इस यम द्वितीया का पालन करने की विधि कुछ इस प्रकार बताई गई है द्वितीया की तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मनुष्य को अपने स्नान इत्यादि कर्मों से निवृत्त होना चाहिए, अपने मन में परम भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और अपने लिए हितकर बातों का चिंतन करना चाहिए । भगवान श्री हरि की पूजा आराधना करने के बाद हरे कृष्ण महामन्त्र का अधिक से अधिक मात्रा में जप करना चाहिए तत्पश्चात स्वच्छ वस्त्र आभूषण धारण करके यदि संभव है तो औदुंबर वृक्ष के नीचे जाकर अष्टदल कमल बनाकर उस में भगवान श्री नारायण की पूजा करनी चाहिए, उन्हें चंदन, अगरू, धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य और नारियल अर्पित करें और फिर ब्राह्मण को गाय का दान दें । यदि गाय का दान देना संभव नहीं है तो अपनी क्षमता अनुसार कुछ भी दान दे सकते हैं, तत्पश्चात अपने परिवार के वरीष्ठ लोगों को प्रणाम करके उनके आशीर्वाद लें और फिर पुरुष को अपनी बहन के घर जाना चाहिए । बहन को अपने भाई का तिलक, अक्षत आदि से स्वागत करना चाहिए, उसे भगवान को अर्पित भोजन प्रसाद खिलाना चाहिए और भाई अपनी क्षमता अनुसार बहन को आशीर्वाद और वस्त्र, अलंकार इत्यादि प्रदान कर सकते हैं । जो भी व्यक्ति इस प्रकार यम द्वितीया का पालन करता है वो अपमृत्यु से मुक्त हो जाता है और पुत्र, पौत्र आदि से संपन्न होता है। जीवन के अंत में मोक्ष प्राप्त करता है, जो भी मनुष्य इस व्रत कथा का श्रवण भी करता है, उसके समस्त पाप नाश हो जाते हैं । जो पुरुष इस दिन अपनी बहन को वस्त्र दान से संतुष्ट करता है, उसे संपूर्ण वर्ष तक कलह अथवा शत्रु भय का सामना नहीं करना पड़ता । यम द्वितीया भाई दूज के दिन जो व्यक्ति अपने बहन के घर भोजन करता है उसे धन एवं उत्तम संपदा की प्राप्ति होती है । इस दिन अगर आप अन्य कोई भी पूजा विधि नहीं कर सकते तो इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, बलरामजी और उनकी बहन सुभद्रा जी का स्मरण करते हुए उनसे प्रार्थना करनी चाहिए और इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के हरे कृष्ण महामन्त्र का अधिक से अधिक जब करना चाहिए तो ये थी आज के यमद्वितिया की कथा और उसका पालन करने की सरल व्रत हुई थी । इस यम द्वितीया या भाई दूज के पवित्र पर्व पर अपने इस जन्म के भाई बहन के रिश्ते में कृष्णभावनामृत की मिठास घोलते हैं और उसे हमारे वास्तविक नित्यसंबंध यानी परम भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ने का प्रयास करते हैं । 

हरे कृष्णा ।



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