Tulsi puja special in Kartik month:- पवित्र कार्तिक मास महात्म्य कथा-7 तुलसी माता पूजन महत्त्व की कथा तथा जाने तुलसी माता सींचने का महत्त्व/ Holy Kartik month significance story-7 Story of importance of Tulsi Mata worship and know the importance of watering Tulsi Mata

  

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कार्तिक मास कथा-7 तुलसी पूजन

 तुलसी माता की व्रत कथा/Tulsi Mata ki kahani:- तुलसी पूजन और बूढ़ी माई की कथा/Tulsi Puja and the Story of Old Mother ~

 एक समय की बात है, किसी नगर में एक बूढ़ी माई रहती थी । वो हर साल कार्तिक का स्नान, व्रत आदि करती थी । सभी औरतें तुलसी को सींचकर चली जाती थी परंतु वह बूढ़ी माई वहाँ आती, तुलसी को सींचती और कहती तुलसी माता सबकी दाता में बेलङा सिंचू तेरा तू कर निस्तारा मेरा । तुलसी माता एडवा दे, लड़वा दें, पितांबर की धोती दे, मीठा मीठा घास दे, वैकुंठ का वास दे, चटके की चाल दे, पटके की मौत दे, चंदन की काट दें, जहाँ झालर की झनकार दे, साई का राज़ दे, दाल भात का जीमन दे, ग्यारस की मौत दें और श्रीकृष्ण का कंधा दे, वह बूढ़ी माई रोज़ आती और तुलसी को सींचते हुए यही बात तुलसी माता से कहने लगी । उसकी यह बात सुनकर तुलसी माता धीरे धीरे सूखने लगी । 1 दिन भगवान श्रीहरि ने उनसे पूछा हे तुलसी इतनी औरतें तुम्हें रोज़ सींचने आती है, मीठा मीठा भोग लगाती है, गीत भी सुनाती है फिर तुम क्यों सूख रही हो? तुलसी माता ने जवाब दिया, प्रभु एक बूढ़ी माई रोज़ मेरे पास आती है और मुझसे यह बात कहती हैं, मैं उसकी हर बात पूरी कर सकती हूँ परंतु श्रीकृष्ण का कन्धा मैं उसे कैसे दे सकती हूँ? तब भगवान श्रीहरि बोले तुलसी तुम चिंता मत करो, उसकी हर बात पूरी करो । जब भी वह बूढ़ी माई मरेगी तो कांधा देने में स्वयं जाऊंगा । कुछ समय बाद ही उस पूरी माइ का देहांत हो गया तो सारे गांव वाले इकट्ठे हुए और उन्हें श्मशान ले जाने की तैयारी की जाने लगी । जब लोग उन्हें उठाने लगे तो वो इतनी भारी हो गयी की किसी से भी नहीं हिली, सब बोले इतनी पूजा पाठ करती थी फिर भी इतनी भारी कैसे हो गयी? तभी वहाँ एक बूढ़े ब्राह्मण आए और पूछने लगे क्या हुआ? तो सभी लोग बोले पापिन थी इसलिए भारी हो गयी है तो वह ब्राह्मण बोले अच्छा मुझे इसके कान में कुछ कहने दो, शायद ये हल्की हो जाए । लोग बोले ठीक है, आप भी कोशिश करके देख लो, तब वह ब्राह्मण उस बूढ़ी माई के पास गए और उसके कान में कहने लगे बूढ़ी माई मन की निकाल लें, अड़वा ले, लङवा ले, पितांबर की धोती ले, मीठा मीठा घास ले, वैकुंठ का वास ले, चटके की चाल ले, पटके की मौत लें, चंदन की काट ले, झालर की झंकार ले, दाल भात का जीमन ले, एकादशी की मौत लें और ले श्रीकृष्ण का कांधा भी ले । इतना कहते ही वह बूढ़ी माई हल्की हो गयी । स्वयं भगवान श्रीहरि उसे अपने कंधे पर ले गए और बूढ़ी माई को मुक्ति मिल गई । है कार्तिक के देव जैसे बूढ़े को मुक्ति मिली, भगवान श्रीकृष्ण का कन्धा मिला, वैसे ही इस कथा को कहते सुनते और हुंकार भरते सब पर कृपा करना । 

जय श्री हरि विष्णु की ।

जय तुलसी माता की ।

 



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