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लंबोदर( गणेश जी ) का वाहन चूहा, |
गणेश जी का वाहन चूहा(मूषक) ?
भगवान गणेश जी को उनके विशाल रूप के लिए जाना जाता है। उनके विशाल रूप के कारण ही उन्हें लंबोदर के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लंबोदर की सवारी छोटा सा मूसा/मूषक क्यों है? इसके पीछे दो पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
1.श्रीगणेश ने क्रोंच को अपनी सवारी क्यों बना लिया ~
कथा के अनुसार राजा इंद्र के दरबार में क्रोंच नामक एक गंधर्व था। एक बार राजा इन्द्र कुछ महत्वपूर्ण बात कर रहे थे। इसी दौरान क्रोंच अफसरों के साथ हँसी ठिठोली में व्यस्त था। तभी राजा इन्द्र नाराज हो गए और उन्होंने क्रोंच को मूषक बनने का शाप दे दिया। इसके बाद मूषक बनकर क्रोंच सीधा ऋषि पराशर के आश्रम में जा गिरा। वहाँ उसने खूब उत्पात मचाया, सारे बर्तन तोड़ दिए और ऋषियों का खाना भी खा लिया। इससे ऋषि काफी परेशान हो गए और भगवान गणेश के पास पहुंचे जिस पर भगवान गणेश ने क्रोंच को मूर्छित कर दिया। वही होश में आते ही क्रोंच ने गणेश जी की आराधना शुरू कर दी जिससे प्रसन्न होकर श्रीगणेश ने क्रोंच को अपनी सवारी बना लिया।
2. एक अन्य कथा के अनुसार एक बार गजमुखासुर नाम के दैत्य ने अपने बाहुबल से देवताओं को बहुत परेशान कर दिया था। सभी देवता एकत्रित होकर भगवान गणेश जी के पास मदद मांगने पहुंचे। तब भगवान श्री गणेश ने उन्हें गजमुखासुर से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिया। तब श्री गणेश का गजमुखासुर से भयंकर युद्ध हुआ। कहते हैं कि उस युद्ध में भगवान गणेश का एक दांत टूट गया। जब क्रोधित होकर श्री गणेश जी ने टूटते हुए दांत से गजमुखासुर पर ऐसा प्रहार किया कि वह घबराकर चूहा बनकर भागा, लेकिन गणेशजी ने उसे पकड़ लिया । मृत्यु के भय से वह क्षमा मांगने लगा। तब श्री गणेश जी ने मूषक रूप में ही उसे अपना वाहन बना लिया। यही मूषक श्री गणेश जी का प्रिय वाहन बना ।
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